भारतीय पिचों का भविष्य: गौतम गंभीर की ‘उछाल और कैरी’ की पुकार और शुभमन गिल की नई कप्तानी

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गौतम गंभीर भारतीय पिचों पर उछाल और कैरी की बात करते हुए

गौतम गंभीर चाहते हैं कि भारतीय पिचों पर तेज गेंदबाजों के लिए भी कुछ हो, केवल स्पिनर्स के लिए नहीं।

भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने हाल ही में क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में शानदार जीत के बाद, गंभीर ने भारतीय पिचों के मिजाज पर खुलकर अपनी राय रखी है। उनकी मांग स्पष्ट है: भारतीय पिचों पर अधिक उछाल (बाउंस) और कैरी होनी चाहिए। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के भविष्य और तेज गेंदबाजों की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है।

गंभीर की `उछाल और कैरी` की मांग: क्यों है यह महत्वपूर्ण?

हम भारतीय क्रिकेट प्रेमी दशकों से अपनी पिचों को `स्पिनरों का स्वर्ग` या `टर्निंग ट्रैक` के रूप में जानते आए हैं। इन पिचों पर गेंद तीसरे दिन से ही `नाचना` शुरू कर देती है और स्पिनर बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बन जाते हैं। लेकिन गंभीर का मानना है कि यह संतुलन के लिए सही नहीं है। दिल्ली में वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट में, भारतीय गेंदबाजों को 200 ओवर तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी, खासकर फॉलो-ऑन देने के बाद। गंभीर ने इसी बात को उठाया:

“मुझे लगता है कि दिल्ली में विकेट और बेहतर हो सकता था। हाँ, हमें पांचवें दिन नतीजा मिला, लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि एज (बल्ले का किनारा) कैरी करना चाहिए। तेज गेंदबाजों के लिए भी कुछ होना चाहिए। हम हमेशा स्पिनरों की भूमिका के बारे में बात करते हैं, लेकिन जब आपके पास दो बेहतरीन तेज गेंदबाज हों, तो आप चाहेंगे कि वे भी खेल में रहें।”

दरअसल, `कैरी` का अर्थ है कि जब बल्लेबाज गेंद को किनारे से छूते हैं, तो वह फील्डर तक पहुंचनी चाहिए, न कि पिच के सामने ही दम तोड़ दे। उछाल और कैरी की कमी तेज गेंदबाजों को हतोत्साहित करती है और खेल को एकतरफा बना देती है। गंभीर का यह बेबाक बयान, कुछ हद तक उस परंपरा को चुनौती देता है जहाँ घरेलू परिस्थितियों का अत्यधिक लाभ उठाया जाता था, कभी-कभी तो खेल की कीमत पर भी।

पिचों का बदलता स्वरूप और न्यूजीलैंड से मिली सीख

पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-0 की करारी हार ने शायद भारतीय क्रिकेट प्रबंधकों को सोचने पर मजबूर किया था। उस हार के बाद से, भारत ने स्पिन-अनुकूल `स्क्वायर टर्नर` से हटकर, बल्ले और गेंद के बीच बेहतर संतुलन वाली पिचों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। अहमदाबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट में गेंदबाजों को काफी मदद मिली, लेकिन दिल्ली का विकेट थोड़ा `अलार्मिंग` था, जैसा कि गंभीर ने कहा।

यह बदलाव न केवल भारतीय टीम की क्षमता को निखारने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि टेस्ट क्रिकेट को विश्व स्तर पर दिलचस्प बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। आखिर, केवल एक तरह की गेंद (स्पिन) का बोलबाला खेल को नीरस बना सकता है। गंभीर की बातों में खेल के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण झलकता है, जहाँ वे वैश्विक टेस्ट क्रिकेट के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं।

शुभमन गिल: एक युवा कप्तान की प्रभावशाली शुरुआत

पिच की बहस से इतर, गंभीर ने युवा कप्तान शुभमन गिल की भी जमकर तारीफ की। गिल ने न केवल टेस्ट कप्तानी में (इंग्लैंड के खिलाफ 2-2 की ड्रॉ सीरीज के साथ) एक प्रभावशाली शुरुआत की है, बल्कि अब उन्हें वनडे टीम का कप्तान भी नियुक्त किया गया है। गंभीर का मानना है कि गिल ने यह सब अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से हासिल किया है, न कि किसी की `मेहरबानी` से।

“किसी ने भी उसे टेस्ट कप्तान या वनडे कप्तान बनाकर कोई एहसान नहीं किया। मुझे लगता है कि वह हर बिट का हकदार है। उसने कड़ी मेहनत की है और वह सभी बॉक्स पर टिक करता है। एक कोच के रूप में, मैं और क्या मांग सकता हूँ? इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैच, एक गुणवत्ता वाली इंग्लैंड टीम के खिलाफ, अनुभवहीन भारतीय टीम के साथ, उसे और क्या सामना करना पड़ता?”

गिल ने न केवल मैदान पर सही निर्णय लिए हैं, बल्कि अपनी टीम को भी बखूबी संभाला है। उनकी नेतृत्व क्षमता, काम के प्रति उनकी नैतिकता और टीम का उनके प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया, यह सब भारतीय क्रिकेट के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। यह वाकई एक कप्तान के लिए बड़ी बात है, खासकर तब जब उसे इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली हो।

घरेलू क्रिकेट का महत्व: तैयारी का मूल मंत्र

गंभीर ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने के महत्व पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि टेस्ट सीरीज से पहले `इंडिया ए` या रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू मैच खेलना, नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में सिर्फ कौशल पर काम करने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

एक पेशेवर खिलाड़ी के लिए लगातार फॉर्मेट बदलना चुनौती भरा हो सकता है, लेकिन गंभीर के अनुसार, यही तो व्यावसायिकता की पहचान है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को उपलब्ध दिनों का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए। दक्षिण अफ्रीका सीरीज से पहले रणजी ट्रॉफी खेलने का उनका सुझाव, खिलाड़ियों को टेस्ट मैच के माहौल में ढालने और मैच-फिटनेस बनाए रखने का एक सटीक तरीका है। यह दर्शाता है कि गंभीर `किताबी` तैयारी से ज्यादा `मैदानी` तैयारी पर विश्वास रखते हैं।

टेस्ट क्रिकेट का भविष्य: एक व्यापक दृष्टिकोण

गंभीर ने वेस्टइंडीज क्रिकेट के महत्व पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “विश्व क्रिकेट को वेस्टइंडीज क्रिकेट की जरूरत है।” यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक संस्कृति और विरासत है। वेस्टइंडीज का संघर्ष, और फिर दिल्ली में उनका जुझारू प्रदर्शन, गंभीर के लिए सुखद था। यह बयान गंभीर के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहाँ वे केवल भारतीय क्रिकेट ही नहीं, बल्कि वैश्विक क्रिकेट के स्वास्थ्य की परवाह करते हैं।

अच्छी पिचों का निर्माण, जहां बल्ले और गेंद के बीच उचित प्रतियोगिता हो, टेस्ट क्रिकेट को जीवित रखने और दर्शकों को मैदान तक खींचने के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारत अब ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महत्वपूर्ण सीरीज खेलने जा रहा है। गंभीर की यह मांग इन आगामी मुकाबलों में भारतीय पिचों के स्वरूप पर क्या प्रभाव डालती है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या हम जल्द ही भारतीय पिचों पर तेज गेंदबाजों को अधिक कहर बरपाते देखेंगे?

निष्कर्षतः, गौतम गंभीर के बयान भारतीय क्रिकेट के एक नए युग की ओर इशारा करते हैं। एक ऐसा युग जहाँ घरेलू फायदे के बजाय, खेल के संतुलन और वैश्विक अपील पर अधिक जोर दिया जाएगा। और शुभमन गिल जैसे युवा कप्तान के नेतृत्व में, यह परिवर्तन न केवल रोमांचक होगा, बल्कि भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, इसकी उम्मीद की जा सकती है।

आदित्य चंद्रमोहन

मुंबई में निवास करने वाले आदित्य चंद्रमोहन खेल पत्रकारिता में बारह वर्षों से सक्रिय हैं। क्रिकेट और कबड्डी की दुनिया में उनकी गहरी समझ है। वे खेल के सूक्ष्म पहलुओं को समझने और उन्हें सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं।

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