एशेज 2025-26 श्रृंखला में ऑस्ट्रेलिया ने भले ही इंग्लैंड पर 3-0 की अजेय बढ़त बना ली हो, लेकिन टीम के अंदरूनी मामले उतने शांत नहीं हैं जितने बाहर से दिखते हैं। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) पर होने वाले चौथे टेस्ट से पहले, ऑस्ट्रेलियाई खेमे में चयन को लेकर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। कोच एंड्रयू मैकडॉनल्ड ने भले ही दिग्गज सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा की जगह पक्की कर दी हो, लेकिन दो युवा सितारों—कैमरन ग्रीन और मार्नस लाबुशेन—का प्रदर्शन प्रबंधन के लिए सिरदर्द बन गया है।
1. उस्मान ख्वाजा: 39 की उम्र में मिला सुरक्षित टिकट
उस्मान ख्वाजा, जो हाल ही में 39 वर्ष के हुए हैं, उनके संन्यास को लेकर बाहरी अटकलें चरम पर थीं। इस श्रृंखला के बाद ऑस्ट्रेलिया को अगले आठ महीनों तक कोई टेस्ट नहीं खेलना है, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई थी। हालांकि, कोच एंड्रयू मैकडॉनल्ड ने इन सभी चर्चाओं पर पूर्णविराम लगाते हुए पुष्टि की है कि ख्वाजा सिडनी टेस्ट में निश्चित रूप से खेलेंगे।
मैकडॉनल्ड ने स्पष्ट किया कि उन्हें ख्वाजा की ओर से संन्यास का कोई संकेत नहीं मिला है। उन्होंने कहा, “बाहरी चर्चाओं से परे, हमने ख्वाजा के भविष्य पर कोई बातचीत नहीं की है। उनका इस कैलेंडर वर्ष में प्रदर्शन इतना बेहतरीन रहा है कि वह चयन के हकदार हैं।”
यह सुरक्षा तब मिली है जब ख्वाजा ने इस एशेज में शारीरिक चुनौतियों का सामना किया। पर्थ में पीठ की ऐंठन के कारण वह सलामी बल्लेबाज के रूप में नहीं खेल पाए, ब्रिसबेन टेस्ट से बाहर रहे, और एडिलेड में स्टीव स्मिथ की बीमारी के कारण टॉस से ठीक 45 मिनट पहले नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने के लिए उन्हें टीम में शामिल किया गया। उस दबाव में भी उन्होंने 82 और 40 रन बनाए। मेलबर्न की मुश्किल पिच पर उनके 29 रन टीम के सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से थे। एक अनुभवी खिलाड़ी की विश्वसनीयता ही उसे यह `लॉक-इन` स्थिति दिलाती है, खासकर जब युवा बल्लेबाज संघर्ष कर रहे हों।
2. कैमरन ग्रीन: भटकता हुआ हरफनमौला और चयन की तलवार
ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी इकाई में सबसे अधिक चिंता का विषय कैमरन ग्रीन की फॉर्म है। यह एक ऐसी समस्या है जो तकनीकी से अधिक मनोवैज्ञानिक और चयन-आधारित प्रतीत होती है। ग्रीन अपनी पिछली 17 टेस्ट पारियों में सिर्फ एक अर्धशतक लगा पाए हैं। यह निराशाजनक आँकड़ा तब और गहरा जाता है जब आप देखते हैं कि उन्हें लगातार अपनी बल्लेबाजी पोजीशन बदलनी पड़ी है।
मैकडॉनल्ड ने इस बात को खुले तौर पर स्वीकार किया है कि ग्रीन लाइन-अप में दूसरों के हिसाब से फिट हो रहे हैं, क्योंकि वह खुद अपनी जगह “पक्की नहीं कर पाए” हैं। ग्रीन को पिछले पांच टेस्ट मैचों में पांच अलग-अलग पोजीशन पर बल्लेबाजी करनी पड़ी। मेलबर्न में, उन्हें एलेक्स कैरी (जिन्होंने नंबर 6 पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है) के पीछे नंबर 7 पर धकेल दिया गया था।
कोच का सीधा बयान है: “वह अभी दूसरों के इर्द-गिर्द फिट बैठता है। उसने जगह पक्की नहीं की है।”
यह बयान युवा ऑलराउंडर पर दबाव बढ़ाता है। इंतजार कर रहे **ब्यू वेबस्टर** (Beau Webster), जिन्होंने अपने 12 प्रथम श्रेणी पारियों में चार अर्धशतक लगाए हैं, सिडनी टेस्ट के लिए एक मजबूत दावेदार बन चुके हैं। चयनकर्ता विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के महत्वपूर्ण अंकों को देखते हुए बल्लेबाजी इकाई की क्षमता को अधिकतम करने के लिए बदलावों पर विचार कर रहे हैं।
3. मार्नस लाबुशेन: `इरादे की कमी` और घटता स्ट्राइक रेट
लाबुशेन का संघर्ष फॉर्म से कम, **माइंडसेट** (मानसिकता) से अधिक जुड़ा हुआ है। कोच मैकडॉनल्ड ने सीधे शब्दों में कहा है कि लाबुशेन के खेल में समस्या तब आती है जब वह रन बनाने का इरादा (Intent) खो देते हैं।
श्रृंखला के शुरुआती दो टेस्ट में लाबुशेन का स्ट्राइक रेट 73.56 था, जिससे वह प्रभावी दिख रहे थे। लेकिन एडिलेड और मेलबर्न में, यह दर गिरकर निराशाजनक 37.7 हो गई। उन्होंने 46 रन बनाने के लिए 122 गेंदें खेलीं।
मैकडॉनल्ड ने बताया, “जब वह स्कोर करने का इरादा खो देते हैं, तो वह खुद को खराब पोजीशन में डाल लेते हैं। वह डिफेंस पर भरोसा करते हुए अपने खोल में वापस चले जाते हैं, और मुझे लगता है कि इसी वजह से उनके खेल में त्रुटि पैदा होती है।”
यह एक तीखा, तकनीकी अवलोकन है। मैकडॉनल्ड ने यह भी याद दिलाया कि लाबुशेन को **एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ODI)** स्तर पर भी “इरादे की कमी” के आधार पर टीम से बाहर किया जा चुका है। कोच की इच्छा स्पष्ट है: लाबुशेन को अपनी पारी में “अधिक व्यस्त” रहने की जरूरत है। बेशक, वह एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं और उनका टेस्ट औसत 40 से ऊपर है, लेकिन महान खिलाड़ियों पर भी थोड़ी सी ‘अकादमिक सुस्ती’ चयनकर्ताओं को चिंतित कर सकती है।
निष्कर्ष: सिडनी में होगी कड़ी परीक्षा
ऑस्ट्रेलिया ने एशेज जीत ली है, लेकिन WTC अंक दांव पर हैं, और टीम अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता पर काम नहीं कर रही है। ख्वाजा का चयन पक्का है, लेकिन ग्रीन और लाबुशेन के प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को मजबूर कर दिया है कि वे सिडनी से पहले गंभीर बातचीत करें। क्या ग्रीन को बाहर करके वेबस्टर को मौका दिया जाएगा? क्या लाबुशेन अपने `इरादे` को वापस लाकर आलोचकों को शांत कर पाएंगे? इन सवालों का जवाब सिडनी की हरी पिच पर ही मिलेगा, जहां ऑस्ट्रेलिया को अपने आंतरिक संकटों को सुलझाना होगा ताकि वे अपनी बल्लेबाजी इकाई को उच्च क्षमता पर ला सकें।
