18 महीनों की खामोशी और तेज गेंदबाज का संघर्ष
तेज गेंदबाजी केवल हुनर का खेल नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच का एक सतत युद्ध है। जब गेंद 150 किमी/घंटा की रफ्तार से निकलती है, तो रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाला दबाव भी उसी अनुपात में बढ़ जाता है। नॉर्खिया, जो अपनी आग उगलती गति के लिए जाने जाते हैं, पिछले 18 महीनों में इसी संघर्ष का सामना कर रहे थे। पीठ की लगातार समस्याओं के कारण उन्हें न केवल 2023 वनडे विश्व कप से बाहर बैठना पड़ा, बल्कि इस दौरान वह सिर्फ दो अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही दिख पाए।
यही वह दौर था जब उनकी प्रतिभा पर अस्थायी विराम लग गया था। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के साथ केंद्रीय अनुबंध (Central Contract) छोड़ने के बावजूद, उनका इरादा स्पष्ट था: वह राष्ट्रीय टीम के लिए उपलब्ध हैं और सबसे बड़े मंच, टी20 विश्व कप, में अपनी जगह सुरक्षित करना चाहते हैं।
नॉर्खिया की ‘आदर्श तैयारी’ का खाका
यह वापसी अचानक नहीं हुई। यह एक सुनियोजित, कदम दर कदम उठाया गया तकनीकी प्रयास था, जिसे नॉर्खिया खुद `आदर्श तैयारी` (Ideal Build-Up) कहते हैं। उनकी यह यात्रा CSA T20 चैलेंज से शुरू हुई, जहां उन्होंने अपनी फिटनेस और लय को परखा। इसके बाद, भारत के खिलाफ हालिया टी20ई श्रृंखला में उनका चयन हुआ। भले ही उन्हें इस श्रृंखला में कोई विकेट नहीं मिला, लेकिन उनकी गति और नियंत्रण में लगातार सुधार दिखाई दिया।
SA20 में सनराइजर्स ईस्टर्न केप के लिए उनका पहला मैच तो मानों पुरानी `नॉर्खिया` की झलक थी। पार्ल रॉयल्स के खिलाफ उन्होंने अपनी सटीक यॉर्कर और प्रभावकारी शॉर्ट गेंदों का इस्तेमाल करते हुए 49 रन पर पूरी टीम को समेटने में अहम भूमिका निभाई। यह उनके पिछले विश्व कप के बाद टी20 में सर्वश्रेष्ठ आंकड़े थे।
शरीर पर भरोसा: वर्कलोड का डर या आत्मविश्वास?
तेज गेंदबाजों के संदर्भ में `वर्कलोड` एक ऐसा शब्द है जो हमेशा खतरे की घंटी बजाता रहता है। SA20 का शेड्यूल चुनौतीपूर्ण है, जहां शुरुआती 10 दिनों में पांच मैच खेलना पड़ सकता है। नॉर्खिया की चोट के इतिहास को देखते हुए, यह चिंता जायज है कि कहीं अत्यधिक दबाव फिर से उन्हें मैदान से दूर न कर दे।
लेकिन नॉर्खिया अब पुरानी चिंताओं को पीछे छोड़ चुके हैं। उनका दर्शन सीधा है: आपको अपने शरीर पर भरोसा करना होगा। यदि आप लगातार गलत होने वाली चीजों के बारे में चिंता करते रहेंगे, तो आप अपना खेल ठीक से नहीं खेल पाएंगे। यह एक ऐसा मानसिक अनुशासन है जो चोट से वापस आने वाले हर एथलीट के लिए अनिवार्य होता है।
वह कहते हैं कि जब वह चोटिल होते हैं, तो उनका एकमात्र लक्ष्य बेहतर होकर वापस आना होता है, ताकि वह अपने खेल के पुराने स्तर को फिर से हासिल कर सकें। यह केवल वापसी नहीं है; यह खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
टी20 से परे: लंबी पारियों का सपना
भले ही उनका तत्काल ध्यान टी20 प्रारूप पर केंद्रित है, नॉर्खिया ने अभी भी लंबे प्रारूपों से मुंह नहीं मोड़ा है। दो वर्षों से उन्होंने कोई वनडे नहीं खेला है और टेस्ट क्रिकेट में उनकी अंतिम उपस्थिति 2023 की शुरुआत में थी। लेकिन वह टेस्ट जर्सी पहनने के लिए उत्सुक हैं।
यह दर्शाता है कि एक तेज गेंदबाज के रूप में, वह न केवल अपनी गति को बरकरार रखने के लिए प्रयासरत हैं, बल्कि अपनी फिटनेस को उस स्तर तक ले जा रहे हैं जहां वह तीनों प्रारूपों की कठोरता को झेल सकें। हालांकि, अभी उनकी प्राथमिकता SA20, टी20 विश्व कप और उसके बाद आईपीएल (लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ) है, जिससे यह साफ है कि आने वाले कुछ महीने उनके करियर के लिए निर्णायक साबित होंगे।
यदि यह पेसर अपनी लय और फिटनेस बनाए रखता है, तो टी20 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदें निश्चित रूप से कई गुना बढ़ जाएंगी। उनकी गति और अनुभव प्रोटियाज टीम के लिए X-फैक्टर साबित हो सकते हैं, जो उन्हें अंततः उस प्रतिष्ठित आईसीसी ट्रॉफी के पास ले जा सकता है, जिसका इंतजार साउथ अफ्रीकी क्रिकेट सालों से कर रहा है।
