सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन के लिए 2025 एक कठिन परीक्षा: गुकेश की वापसी की रणनीति, कोच गजेवस्की के नजरिए से

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विश्व चैंपियन गुकेश डोम्माराजू: 2025 का संघर्ष और 2026 विश्व खिताब की वापसी की रणनीति

दिसंबर 2024 में जब डी. गुकेश डोम्माराजू ने सबसे कम उम्र के शतरंज विश्व चैंपियन (Youngest Chess World Champion) बनकर इतिहास रचा था, तब उम्मीदों का आसमान छू लिया गया था। लेकिन, 2025 का साल उनके लिए किसी रोलर कोस्टर से कम नहीं रहा। यह साल चुनौतियों से भरा रहा, खासकर तब, जब बड़े टूर्नामेंट्स में उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े हुए। हाल ही में FIDE विश्व कप के तीसरे दौर में बाहर हो जाने के बाद, उनके विश्व चैंपियन के दर्जे पर भी बाहरी दुनिया में फुसफुसाहट शुरू हो गई है।

चमकदार शुरुआत बनाम निराशाजनक अंत

वर्ष 2025 में गुकेश का सफर विरोधाभासों से भरा रहा है। एक तरफ उन्होंने टाटा स्टील मास्टर्स में शानदार प्रदर्शन किया, जहां वे टाई-ब्रेक पर आर. प्रज्ञानानंदा से खिताब चूके, और नॉर्वे शतरंज इवेंट में मैग्नस कार्लसन को कड़ी टक्कर दी—यहां तक कि स्टवान्गर में उन्होंने कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में और ज़ाग्रेब में रैपिड शतरंज में हराया भी। ये जीतें दर्शाती हैं कि प्रतिभा अभी भी ज़ोरों पर है।

लेकिन दूसरी तरफ, साल के दो सबसे बड़े इवेंट—FIDE ग्रैंड स्विस (जहां वह 41वें स्थान पर रहे) और FIDE विश्व कप—विफलता लेकर आए। इसके अतिरिक्त, सिंकफील्ड कप और सुपरबेट शतरंज क्लासिक जैसे शास्त्रीय आयोजनों में संघर्ष, और सबसे महत्वपूर्ण, तेज टाइम कंट्रोल वाले प्रारूपों (रैपिड और ब्लिट्ज) में उनकी निरंतर कमज़ोरी ने साबित कर दिया कि 2025 विश्व चैंपियन के मानकों से काफी नीचे रहा।

दबाव और युवावस्था: कोच गजेवस्की का बचाव

गुकेश के कोच ग्रज़ेगोर्ज़ गजेवस्की (Grzegorz Gajewski) इस अस्थिरता से चिंतित नहीं हैं। ESPN के साथ एक विशेष बातचीत में गजेवस्की ने इस प्रदर्शन को गुकेश की कम उम्र (किशोरावस्था) से जोड़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि अभिजात वर्ग के खेल में एक युवा खिलाड़ी की निरंतरता में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है।

गजेवस्की ने एक गहरा मनोवैज्ञानिक पहलू भी उजागर किया: `जब आप जीवन भर एक लक्ष्य के लिए काम करते हैं, और उसे हासिल कर लेते हैं, तो आपको नई प्रेरणा ढूंढनी पड़ती है। इतने कम उम्र के किसी व्यक्ति के लिए यह मुश्किल हो सकता है।`

हालांकि, बाहरी शतरंज जगत, जिसमें गैरी कास्पारोव और मैग्नस कार्लसन जैसे दिग्गज शामिल हैं, इतनी उदारता नहीं दिखाता। कास्पारोव ने तो यहां तक कह दिया कि विश्व चैंपियनशिप का ताज गुकेश के सिर पर वैसे नहीं फब रहा, जैसे वह उनके, क्रैमनिक या कार्लसन के सिर पर फबता था। यह टिप्पणी शायद थोड़ी अनुचित है, लेकिन शतरंज की दुनिया एक ऐसे विश्व चैंपियन की आदी है जो लगभग पूर्णता के करीब हो—एक ऐसी अपेक्षा जिसका बोझ 18 वर्षीय गुकेश को उठाना पड़ रहा है।

गजेवस्की इस बाहरी संदेह पर हैरान हैं। वह कहते हैं, `क्या वह विश्व चैंपियनशिप के हकदार हैं? बिल्कुल हैं, क्योंकि उन्होंने इसे जीता है।` यह जवाब तकनीकी रूप से सटीक है, और शायद शतरंज के नियम-पुस्तिका में सबसे बड़ा सत्य है।

2026 की रणनीति: ब्रेक और क्लासिकल पर फोकस

गुकेश और उनकी टीम जानते हैं कि सुधार आवश्यक है। गजेवस्की ने संकेत दिया कि गलतियां, जो इस साल टूर्नामेंट गंवाने का कारण बनीं, गुकेश के लिए असामान्य नहीं हैं। हालांकि उन्होंने तकनीकी खामियों का विस्तार से उल्लेख करने से इनकार कर दिया (शीर्ष रहस्य, विश्व खिताब की रक्षा के मद्देनजर), उन्होंने आने वाले वर्ष के लिए एक महत्वपूर्ण सीख पर प्रकाश डाला:

2026 में, गुकेश की टीम टूर्नामेंट चयन में अधिक चयनात्मक (Selective) होगी।

2025 में, गुकेश ने लगभग हर बड़े इवेंट में भाग लिया—फ़्रीस्टाइल शतरंज टूर, ग्रैंड शतरंज टूर, टाटा स्टील, नॉर्वे शतरंज, और कई प्रदर्शनियाँ। एक तरफ, क्लच चेस इवेंट (जहां कार्लसन, नाकामुरा और कारुआना जैसे शीर्ष खिलाड़ी थे) जैसे अवसर को मना करना कठिन था। लेकिन दूसरी तरफ, लगातार खेलने से आराम और मानसिक रीसेट का मौका नहीं मिला।

गजेवस्की और टीम अब इस बात पर विचार कर रही है कि अवसरों को साधते हुए भी चैंपियन को ज़रूरी ब्रेक कैसे दिया जाए। उनका प्राथमिक ध्यान 2026 में क्लासिकल शतरंज पर रहेगा, जो उनके खिताब की रक्षा के लिए निर्णायक है।

निष्कर्ष: वापसी की तैयारी

गुकेश ने पिछले साल चैंपियन बनने के बाद खुद कहा था कि वह अभी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन वह बनना चाहते हैं। 2025 के प्रमाणों के आधार पर, वह शायद उस लक्ष्य से थोड़ा दूर हो गए हैं, लेकिन यह साल उन्हें महत्वपूर्ण सबक सिखा रहा है।

ग्रज़ेगोर्ज़ गजेवस्की और गुकेश डोम्माराजू एक बार इस संघर्ष से गुज़र चुके हैं, और अब वे 2026 में अपने खिताब की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यदि गुकेश लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने में सफल होते हैं, तो उनकी योग्यता और दर्जे पर उठाए गए सभी सवाल स्वयं ही शांत हो जाएंगे। आखिर, कोई बैक-टू-बैक विश्व चैंपियन की वैधता पर सवाल कैसे उठा सकता है?

प्रमोद विश्वनाथ

बेंगलुरु के वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रमोद विश्वनाथ फुटबॉल और एथलेटिक्स के विशेषज्ञ हैं। आठ वर्षों के अनुभव ने उन्हें एक अनूठी शैली विकसित करने में मदद की है।

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