जॉर्जिया के बाटुमी में आयोजित 25वीं यूरोपीय टीम शतरंज चैम्पियनशिप 2025 का परिणाम दुनिया के लिए एक संदेश था। जब युद्ध के बादल किसी राष्ट्र को घेर लेते हैं, तो खेल अक्सर सबसे पहले पीछे हटता है। लेकिन यूक्रेन की पुरुष टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर और महिला टीम ने रजत पदक हासिल करके, इस धारणा को खंडित कर दिया। यह केवल शतरंज की जीत नहीं थी; यह अडिग टीम भावना, कर्तव्य और राष्ट्रीय गौरव की अभिव्यक्ति थी।
इस असाधारण उपलब्धि के पीछे की कहानी, चुनौतियों, और रणनीति को समझने के लिए, हमने उन दो दिग्गजों की बातचीत के अंशों का विश्लेषण किया जिन्होंने इस टीम का नेतृत्व किया: कप्तान अलेक्जेंडर बेलियाव्स्की (Alexander Beliavsky) और टीम ट्रेनर एड्रियन मिखालचिशिन (Adrian Mikhalchishin)।
कर्तव्य की वापसी: कोचों का आह्वान
यूक्रेनी शतरंज का 21वीं सदी का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है, जिसमें दो शतरंज ओलंपियाड जीतें शामिल हैं। लेकिन 2022 में पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू होने के बाद सब कुछ बिखर गया। कप्तान बदल गए, कई खिलाड़ी देश छोड़कर चले गए, और 2023 में तो पुरुषों की टीम इकट्ठा करना भी असंभव हो गया था।
ऐसे में, संघ ने अलेक्जेंडर बेलियाव्स्की से संपर्क किया, जिन्होंने दशकों तक यूक्रेन का प्रतिनिधित्व किया था। बेलियाव्स्की ने पिछले 30 वर्षों से स्लोवेनिया के लिए खेला था, लेकिन युद्धकाल में उन्होंने इसे अपना नैतिक कर्तव्य माना।
बाद में अगस्त में, बेलियाव्स्की के अनुरोध पर, एड्रियन मिखालचिशिन भी टीम ट्रेनर के रूप में शामिल हुए। मिखालचिशिन, जिन्होंने 1969 से एक खिलाड़ी के रूप में यूक्रेन का प्रतिनिधित्व किया था, के लिए यह एक स्पष्ट नैतिक दायित्व था।
रणनीति और “ऑक्सीजन टैंक”: टीम की तैयारी
यह जीत आसान नहीं थी। टीम को फंडिंग की समस्याओं और राजनीतिक जटिलताओं का भी सामना करना पड़ा। जॉर्जिया की सीमा पर ग्रैंडमास्टर नतालिया झूकोवा से दो बार पूछताछ की गई, और इगोर ग्लेक को घंटों हिरासत में रखा गया—हालांकि जॉर्जियाई फेडरेशन के अध्यक्ष के हस्तक्षेप से ये मामले सुलझ गए।
कोचिंग की जिम्मेदारियाँ बेलियाव्स्की और मिखालचिशिन के बीच विभाजित थीं। बेलियाव्स्की कप्तान के रूप में लाइन-अप तय करते थे, जबकि मिखालचिशिन व्यक्तिगत खिलाड़ियों, विशेष रूप से अलेक्जेंडर वोलोकितिन और इहोर कोवालेंको, की मदद करते थे।
वोलोकितिन के साथ मिखालचिशिन की मुख्य चुनौती क्या थी? **उनकी तैयारी को सीमित करना।** मिखालचिशिन बताते हैं, “उनकी तैयारी हमेशा 40 चालों तक जाती है!” यह शायद ही कभी कोई सुनेगा कि एक कोच अपने खिलाड़ी की अत्यधिक तैयारी को कम करने की कोशिश कर रहा हो।
लेकिन कोचिंग का एक अपरंपरागत हिस्सा भी था: टीम के मनोबल को मजबूत करने के लिए **दैनिक एक घंटे की `ऑक्सीजन टैंक` सैर**। मिखालचिशिन के अनुसार, यह बोतविनिक की सलाह थी। इन सैरों और साझा भोजन ने टीम के भीतर जबरदस्त तालमेल पैदा किया।
नए चेहरों और दिग्गजों का संतुलन
बुडापेस्ट ओलंपियाड में मामूली परिणाम के बाद, कप्तान बेलियाव्स्की नई ऊर्जा चाहते थे। टीम का चयन महत्वपूर्ण था। अनुभवी ग्रैंडमास्टर वासिली इवानचुक बोर्ड एक पर खेलना चाहते थे, लेकिन 56 वर्ष की आयु में, ऐसे तनावपूर्ण आयोजनों में यह ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी थी।
टीम में इहोर कोवालेंको और इहोर समुनेंकोव का चयन महत्वपूर्ण साबित हुआ। कोवालेंको तीन साल सेना में बिताने के बाद अभ्यास में कमी से जूझ रहे थे, जिसके लिए उनके और समुनेंकोव के बीच एक प्रशिक्षण मैच आयोजित किया गया, जिसने दोनों की फॉर्म को जबरदस्त रूप से सुधारा। समुनेंकोव एक उभरती हुई प्रतिभा थे, जिनका प्रशिक्षण जीएम एलेक्स चेर्निन ने किया था।
- शीर्ष बोर्ड पर रुस्लान पोनोमारियोव (Ruslan Ponomariov) बड़े खिलाड़ियों को बेअसर करेंगे (उन्होंने अपने सभी खेल ड्रॉ किए)।
- वोलोकितिन और कोरोबोव (Korobov) बोर्ड दो को मजबूती देंगे।
- और जीत के लिए पूरी तरह से दोनों इहोर (कोवालेंको और समुनेंकोव) पर भरोसा किया जाएगा।
टीम नौवें वरीयता प्राप्त थी, उन्हें पदक दावेदार नहीं माना जा रहा था। बेलियाव्स्की याद करते हैं, “हमने कोई उम्मीद नहीं रखी थी – बस इरादा था अच्छा शतरंज खेलने का।” उन्होंने विश्व चैंपियन तिगरान पेट्रोसियन की सलाह को याद किया: “आराम करो और आनंद लो। मैंने विश्व चैंपियन इसी तरह बना।”
युद्ध की काली छाया और शतरंज का महत्व
यूक्रेन के लिए यह जीत केवल खेल नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय मनोबल का प्रतीक थी। यह सफलता उन अविश्वसनीय कठिनाइयों की पृष्ठभूमि में आई है जिनका देश सामना कर रहा है।
कोवालेंको ने खुद तीन साल युद्ध के मैदान में बिताए और उन्हें “वीरता के लिए” पदक से सम्मानित किया गया। बेलियाव्स्की और मिखालचिशिन पुष्टि करते हैं कि हालांकि किसी ग्रैंडमास्टर की मृत्यु की जानकारी नहीं है, लेकिन व्यापक शतरंज समुदाय ने 40-50 प्रशिक्षकों और जूनियर खिलाड़ियों को खोया है।
दैनिक जीवन भी प्रभावित है। हवाई हमले के अलर्ट दिनचर्या का हिस्सा हैं। बिजली कटौती (ब्लैकआउट) 12 घंटे से अधिक तक चलती है, और बच्चे कभी-कभी मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ते हैं। यात्राएं जो पहले छह घंटे लेती थीं, अब 24 घंटे से अधिक समय लेती हैं। मजबूत अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट गायब हो गए हैं, और ल्वीव के प्रसिद्ध जीएम क्लब, जहाँ कभी 23 ग्रैंडमास्टर हुआ करते थे, अब केवल चार या पाँच प्रतिभागियों के साथ कभी-कभी ब्लिट्ज टूर्नामेंट आयोजित कर पाता है।
विजेता की मानसिकता
बेलियाव्स्की बताते हैं कि टीम के कई खिलाड़ियों की एलो रेटिंग पहले की तुलना में कम हो सकती है (अधिकांश 40 के करीब हैं), लेकिन वे अभी भी बेहद खतरनाक हैं। मिखालचिशिन इसे “विजेता की स्मृति” (Winner’s Memory) कहते हैं। जिन खिलाड़ियों ने पहले प्रमुख टीम इवेंट जीते हैं, जब वे एक साथ खेलते हैं तो यह मानसिकता सब कुछ बदल देती है। यह उनकी क्षमता और अनुभव का मिश्रण था जिसने उन्हें सफलता दिलाई।
यह जीत पूरे देश में मनाई जाएगी। टीम राज्य के नेताओं से मिलने वाली है और खिलाड़ियों को राज्य पदकों के लिए नामांकित किया गया है। युद्ध के बावजूद, यूक्रेन में शतरंज की एक लंबी परंपरा है, और ऐसी सफलता को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाता है।
कोच उम्मीद करते हैं कि यूरोप यूक्रेन का समर्थन जारी रखेगा, और भविष्य के लिए उनकी सबसे बड़ी आशा है कि देश में जल्द ही शांति स्थापित हो।
